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معاف کر مری مستی خدائے عز و جل
معاف کر مری مستی خدائے عز و جل
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हवा ही लौ को घटाती वही बढ़ाती है
ہوا ہی لو کو گھٹاتی وہی بڑھاتی ہے
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वाँ वो तो घर से अपने पी कर शराब निकला
واں وہ تو گھر سے اپنے پی کر شراب نکلا
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जिस जा नसीम शाना-कश-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार है
جس جا نسیم شانہ کش زلف یار ہے
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ब नाला हासिल-ए-दिल-बस्तगी फ़राहम कर
بہ نالہ حاصل دل بستگی فراہم کر
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