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परदे में लाख फिर भी नुमूदार कौन है
پردے میں لاکھ پھر بھی نمودار کون ہے
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परदे में इस बदन के छुपें राज़ किस तरह
پردے میں اس بدن کے چھپیں راز کس طرح
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ज़िंदगानी जावदानी भी नहीं
زندگانی جاودانی بھی نہیں
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कब से हम लोग इस भँवर में हैं
کب سے ہم لوگ اس بھنور میں ہیں
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मुझे दर से अपने तो टाले है यह बता मुझे तू कहाँ नहीं
مجھے در سے اپنے تو ٹالے ہے یہ بتا مجھے تو کہاں نہیں
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