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पलकों की दहलीज़ पे चमका एक सितारा था
پلکوں کی دہلیز پہ چمکا ایک ستارا تھا
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उन ने किया था याद मुझे भूल कर कहीं
ان نے کیا تھا یاد مجھے بھول کر کہیں
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ग़ाफ़िल ब वहम-ए-नाज़ ख़ुद-आरा है वर्ना याँ
غافل بہ وہم ناز خود آرا ہے ورنہ یاں
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है बज़्म-ए-बुताँ में सुख़न आज़ुर्दा लबों से
ہے بزم بتاں میں سخن آزردہ لبوں سے
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थक गया है दिल-ए-वहशी मिरा फ़रियाद से भी
تھک گیا ہے دل وحشی مرا فریاد سے بھی
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