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चमन में सुबह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम
چمن میں صبح یہ کہتی تھی ہو کر چشم تر شبنم
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मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था
مدرسہ یا دیر تھا یا کعبہ یا بت خانہ تھا
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ऐसा तिरा रह गुज़र न होगा
ایسا ترا رہ گزر نہ ہوگا
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गर्म फ़रियाद रक्खा शक्ल-ए-निहाली ने मुझे
گرم فریاد رکھا شکل نہالی نے مجھے
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लो हम मरीज़-ए-इश्क़ के बीमार-दार हैं
لو ہم مریض عشق کے بیمار دار ہیں
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