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हर कोई दिल की हथेली पे है सहरा रखे
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہر کوئی دل کی ہتھیلی پہ ہے صحرا رکھے
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मत हो मग़रूर ऐ कि तुझ में ज़ोर है
मीर तक़ी मीर द्वारा
مت ہو مغرور اے کہ تجھ میں زور ہے
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जगा सके न तिरे लब लकीर ऐसी थी
परवीन शाकिर द्वारा
جگا سکے نہ ترے لب لکیر ایسی تھی
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यह बे-दिली है तो कश्ती से यार क्या उतरें
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ بے دلی ہے تو کشتی سے یار کیا اتریں
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उन ने किया था याद मुझे भूल कर कहीं
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ان نے کیا تھا یاد مجھے بھول کر کہیں
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रहे ख़याल तनक हम भी रू सियाहों का
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہے خیال تنک ہم بھی رو سیاہوں کا
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हर कोई तुर्रा-ए-पेचाक पहन कर निकला
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہر کوئی طرۂ پیچاک پہن کر نکلا
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