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दिल गए आफ़त आई जानों पर
دل گئے آفت آئی جانوں پر
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कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को
کبھی کہا نہ کسی سے ترے فسانے کو
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किसी का नाम लो बे-नाम अफ़साने बहुत से हैं
کسی کا نام لو بے نام افسانے بہت سے ہیں
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वो आग़ाज़-ए-मोहब्बत का ज़माना
وہ آغاز محبت کا زمانہ
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मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फ़साना सुनाता रहा दम निकलते निकलते
مریض محبت انہیں کا فسانہ سناتا رہا دم نکلتے نکلتے
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