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दिल गए आफ़त आई जानों पर
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل گئے آفت آئی جانوں پر
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कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को
قمر جلالوی द्वारा
کبھی کہا نہ کسی سے ترے فسانے کو
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किसी का नाम लो बे-नाम अफ़साने बहुत से हैं
قمر جلالوی द्वारा
کسی کا نام لو بے نام افسانے بہت سے ہیں
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वो आग़ाज़-ए-मोहब्बत का ज़माना
قمر جلالوی द्वारा
وہ آغاز محبت کا زمانہ
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मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फ़साना सुनाता रहा दम निकलते निकलते
قمر جلالوی द्वारा
مریض محبت انہیں کا فسانہ سناتا رہا دم نکلتے نکلتے
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फ़क़ीह-ए-शहर की मजलिस से कुछ भला न हुआ
अहमद फ़राज़ द्वारा
فقیہ شہر کی مجلس سے کچھ بھلا نہ ہوا
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हमारे ज़ख़्म-ए-तमन्ना पुराने हो गए हैं
जौन एलिया द्वारा
ہمارے زخم تمنا پرانے ہو گئے ہیں
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जब हर एक शहर बलाओं का ठिकाना बन जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
جب ہر اک شہر بلاؤں کا ٹھکانہ بن جائے
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उन्हें क्यों फूल दुश्मन ईद में पहनाए जाते हैं
قمر جلالوی द्वारा
انہیں کیوں پھول دشمن عید میں پہنائے جاتے ہیں
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