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कली कहते हैं उस का सा दहन है
کلی کہتے ہیں اس کا سا دہن ہے
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समझ में ज़िंदगी आए कहाँ से
سمجھ میں زندگی آئے کہاں سے
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अभी फ़रमान आया है वहाँ से
ابھی فرمان آیا ہے وہاں سے
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रंज खींचे थे दाग़ खाए थे
رنج کھینچے تھے داغ کھائے تھے
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शाम-ए-फ़िराक़ अब ना पूछ आई और आ के टल गई
شام فراق اب نہ پوچھ آئی اور آ کے ٹل گئی
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