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तरस रहा हूँ मगर तू नज़र न आ मुझ को
ترس رہا ہوں مگر تو نظر نہ آ مجھ کو
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ये आलम-ए-शौक़ का देखा न जाए
یہ عالم شوق کا دیکھا نہ جائے
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ऐ मेरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
اے مرے ہم نشیں چل کہیں اور چل اس چمن میں اب اپنا گزارہ نہیں
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हम भी फिरते हैं यक हशम ले कर
ہم بھی پھرتے ہیں یک حشم لے کر
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कब तक तू इम्तिहाँ में मुझ से जुदा रहेगा
کب تک تو امتحاں میں مجھ سے جدا رہے گا
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