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अश्क आँखों में कब नहीं आता
मीर तक़ी मीर द्वारा
اشک آنکھوں میں کب نہیں آتا
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जीते जी कूचए-दिल-दार से जाया न गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
جیتے جی کوچۂ دل دار سے جایا نہ گیا
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चोरी में दिल की वो हुनर कर गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
چوری میں دل کی وہ ہنر کر گیا
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वो तफ़ावुतें हैं मरे ख़ुदा कि ये तो नहीं कोई और है
अहमद फ़राज़ द्वारा
وہ تفاوتیں ہیں مرے خدا کہ یہ تو نہیں کوئی اور ہے
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शर्ह-ए-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई
فیض احمد فیض द्वारा
شرح بے دردئ حالات نہ ہونے پائی
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जब नाम तिरा लीजिये तब चश्म भर आवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب نام ترا لیجیے تب چشم بھر آوے
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दिल में अब यूं तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
دل میں اب یوں ترے بھولے ہوئے غم آتے ہیں
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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
فیض احمد فیض द्वारा
دونوں جہان تیری محبت میں ہار کے
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वह अहद-ए-ग़म की काहिश-हाए-बे-हासिल को क्या समझें
فیض احمد فیض द्वारा
وہ عہد غم کی کاہش ہائے بے حاصل کو کیا سمجھے
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रफ़ाक़तों में पशेमानियाँ तो होती हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
رفاقتوں میں پشیمانیاں تو ہوتی ہیں
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किए आरज़ू से पैमां जो मा'ल तक न पहुंचे
فیض احمد فیض द्वारा
کیے آرزو سے پیماں جو مآل تک نہ پہنچے
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अब के बरस दस्तूर-ए-सितम में क्या क्या बाब ईज़ाद हुए
فیض احمد فیض द्वारा
اب کے برس دستور ستم میں کیا کیا باب ایزاد ہوئے
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अर्ज़-ए-ग़म कभी उस के रू-ब-रू भी हो जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
عرض غم کبھی اس کے روبرو بھی ہو جائے
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तुम आए हो न शब-ए-इंतज़ार गुज़री है
فیض احمد فیض द्वारा
تم آئے ہو نہ شب انتظار گزری ہے
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कभी जब मुद्दतों के बाद उस का सामना होगा
जौन एलिया द्वारा
کبھی جب مدتوں کے بعد اس کا سامنا ہوگا
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शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
فیض احمد فیض द्वारा
شفق کی راکھ میں جل بجھ گیا ستارۂ شام
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आए हैं मीर काफ़िर हो कर ख़ुदा के घर में
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ کافر ہو کر خدا کے گھر میں
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ऐ सनम तुझ को हम भुला न सके
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم تجھ کو ہم بھلا نہ سکے
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बग़ैर दिल के यह क़ीमत है सारे आलम की
मीर तक़ी मीर द्वारा
بغیر دل کہ یہ قیمت ہے سارے عالم کی
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तुझे ढूँढती हैं नज़रें मुझे एक झलक दिखा जा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تجھے ڈھونڈھتی ہیں نظریں مجھے اک جھلک دکھا جا
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