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कभी रक़्स-ए-शाम-ए-बहार में उसे देखते
کبھی رقص شام بہار میں اسے دیکھتے
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थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी
تھے خواب ایک ہمارے بھی اور تمہارے بھی
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खेल उस ने दिखा के जादू के
کھیل اس نے دکھا کے جادو کے
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मुवा मैं सजदे में पर नक़्श मेरा बार रहा
موا میں سجدے میں پر نقش میرا بار رہا
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दो दिन से कुछ बनी थी सो फिर शब बिगड़ गई
دو دن سے کچھ بنی تھی سو پھر شب بگڑ گئی
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