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उसके पहलू से लग के चलते हैं
اس کے پہلو سے لگ کے چلتے ہیں
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तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो
تم حقیقت نہیں ہو حسرت ہو
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उस ने हम को गुमान में रखा
اس نے ہم کو گمان میں رکھا
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हर एक बात न क्यों ज़हर सी हमारी लगे
ہر ایک بات نہ کیوں زہر سی ہماری لگے
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हम भी शायर थे कभी जान-ए-सुख़न याद नहीं
ہم بھی شاعر تھے کبھی جان سخن یاد نہیں
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