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ग़म

सभी 204अशआर 0ग़ज़ल 204
ग़ज़ल204
मुझ सोज़ बाद-ए-मर्ग से आगाह कौन है
مجھ سوز بعد مرگ سے آگاہ کون ہے
कसरत-ए-दाग़ से दिल रश्क-ए-गुलिस्ताँ न हुआ
کثرت داغ سے دل رشک گلستاں نہ ہوا
बेताबियों में तंग हम आए हैं जान से
بیتابیوں میں تنگ ہم آئے ہیں جان سے
सोज़िश-ए-दिल से मुफ़्त गुलते हैं
سوزش دل سے مفت گلتے ہیں
हिज्राँ की कोफ़्त खेंचे बे-दम से हो चले हैं
ہجراں کی کوفت کھینچے بے دم سے ہو چلے ہیں
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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