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मुँह तका ही करे है जिस तिस का
मीर तक़ी मीर द्वारा
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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था मुस्तआर हुस्न से उस के जो नूर था
मीर तक़ी मीर द्वारा
تھا مستعار حسن سے اس کے جو نور تھا
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ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
غم رہا جب تک کہ دم میں دم رہا
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शर्ह-ए-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई
فیض احمد فیض द्वारा
شرح بے دردئ حالات نہ ہونے پائی
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जमेगी कैसे बिसात-ए-यारां कि शीशा-ओ-जाम बुझ गए हैं
فیض احمد فیض द्वारा
جمے گی کیسے بساط یاراں کہ شیشہ و جام بجھ گئے ہیں
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ढूंढा न पाईए जो इस वक़्त में सो ज़र है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ڈھونڈا نہ پائیے جو اس وقت میں سو زر ہے
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जिन जिन को था यह इश्क़ का आज़ार मर गए
मीर तक़ी मीर द्वारा
جن جن کو تھا یہ عشق کا آزار مر گئے
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कभी जब मुद्दतों के बाद उस का सामना होगा
जौन एलिया द्वारा
کبھی جب مدتوں کے بعد اس کا سامنا ہوگا
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پتا پتا بوٹا بوٹا حال ہمارا جانے ہے
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एक परवाज़ को भी रुख़सत-ए-सय्याद नहीं
मीर तक़ी मीर द्वारा
ایک پرواز کو بھی رخصت صیاد نہیں
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गुस्से से उठ चले हो तो दामन को झाड़ कर
मीर तक़ी मीर द्वारा
غصے سے اٹھ چلے ہو تو دامن کو جھاڑ کر
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ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
मीर तक़ी मीर द्वारा
زخم جھیلے داغ بھی کھائے بہت
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ऐ दोस्त कोई मुझ सा रुस्वा न हुआ होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
اے دوست کوئی مجھ سا رسوا نہ ہوا ہوگا
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बग़ैर दिल के यह क़ीमत है सारे आलम की
मीर तक़ी मीर द्वारा
بغیر دل کہ یہ قیمت ہے سارے عالم کی
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शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें
जौन एलिया द्वारा
شرمندگی ہے ہم کو بہت ہم ملے تمہیں
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आज यूं मौज दर मौज ग़म थम गया
فیض احمد فیض द्वारा
آج یوں موج در موج غم تھم گیا
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कली कहते हैं उस का सा दहन है
मीर तक़ी मीर द्वारा
کلی کہتے ہیں اس کا سا دہن ہے
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रंज खींचे थे दाग़ खाए थे
मीर तक़ी मीर द्वारा
رنج کھینچے تھے داغ کھائے تھے
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बात बस से निकल चली है
فیض احمد فیض द्वारा
بات بس سے نکل چلی ہے
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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
जौन एलिया द्वारा
نہ ہوا نصیب قرار جاں ہوس قرار بھی اب نہیں
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