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उम्र भर हम रहे शराबी से
मीर तक़ी मीर द्वारा
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
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हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
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चोरी में दिल की वो हुनर कर गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
چوری میں دل کی وہ ہنر کر گیا
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जब नाम तेरा लीजिए तब चश्म भर आवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب نام ترا لیجیے تب چشم بھر آوے
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
راہ دور عشق میں روتا ہے کیا
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गरचह कब देखते हो पर देखो
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرچہ کب دیکھتے ہو پر دیکھو
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करे क्या कि दिल भी तो मजबूर है
मीर तक़ी मीर द्वारा
کرے کیا کہ دل بھی تو مجبور ہے
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क्या मैं भी परेशानी-ए-ख़ातिर से क़रीं था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا میں بھی پریشانیٔ خاطر سے قریں تھا
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कुछ मौज-ए-हवा-ए-पेचां ऐ मीर नज़र आई
मीर तक़ी मीर द्वारा
کچھ موج ہوا پیچاں اے میرؔ نظر آئی
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पयाम आए हैं उस यार-ए-बे-वफ़ा के मुझे
अहमद फ़राज़ द्वारा
پیام آئے ہیں اس یار بے وفا کے مجھے
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आए हैं मीरؔ मुँह को बनाए ख़फ़ा से आज
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ منہ کو بنائے خفا سے آج
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दैर-ओ-हरम से गुज़रे अब दिल है घर हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیر و حرم سے گزرے اب دل ہے گھر ہمارا
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दिल गए आफ़त आई जानों पर
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل گئے آفت آئی جانوں پر
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होती है गरचह कहने से यारो पराई बात
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہوتی ہے گرچہ کہنے سے یارو پرائی بات
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अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
ابھی کچھ اور کرشمے غزل کے دیکھتے ہیں
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किसी गुमां पे तवक्कुअ ज़्यादा रखते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
کسی گماں پہ توقع زیادہ رکھتے ہیں
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शर्ह-ए-फ़िराक़ मदह-ए-लब-ए-मुश्कबू करें
فیض احمد فیض द्वारा
شرح فراق مدح لب مشکبو کریں
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रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम
فیض احمد فیض द्वारा
رنگ پیراہن کا خوشبو زلف لہرانے کا نام
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गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
فیض احمد فیض द्वारा
گلوں میں رنگ بھرے باد نوبہار چلے
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इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس قدر مسلسل تھیں شدتیں جدائی کی
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