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क्या कहिए कि ख़ूबां ने अब हम में है क्या रखा
کیا کہیے کہ خوباں نے اب ہم میں ہے کیا رکھا
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जाँ गुदाज़ इतनी कहाँ आवाज़ ऊद-ओ-चंग है
جاں گداز اتنی کہاں آواز عود و چنگ ہے
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गुल शर्म से बह जाएगा गुलशन में हो कर आब सा
گل شرم سے بہہ جائے گا گلشن میں ہو کر آب سا
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वाँ वो तो घर से अपने पी कर शराब निकला
واں وہ تو گھر سے اپنے پی کر شراب نکلا
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जिस जा नसीम शाना-कश-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार है
جس جا نسیم شانہ کش زلف یار ہے
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