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आँख उठी मोहब्बत ने अंगड़ाई ली
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھ اٹھی محبت نے انگڑائی لی
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काश उठें हम भी गुनाहगारों के बीच
मीर तक़ी मीर द्वारा
کاش اٹھیں ہم بھی گنہ گاروں کے بیچ
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यूँ सजा चाँद कि छलका तेरे अंदाज़ का रंग
فیض احمد فیض द्वारा
یوں سجا چاند کہ جھلکا ترے انداز کا رنگ
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जो मिटा है तेरे जमाल पर वो हर एक ग़म से गुज़र गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جو مٹا ہے تیرے جمال پر وہ ہر ایک غم سے گزر گیا
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है किस क़दर हलाक-ए-फ़रेब-ए-वफ़ा-ए-गुल
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
ہے کس قدر ہلاک فریب وفائے گل
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फिर उस से तरह कुछ जो दावे की सी डाली है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پھر اس سے طرح کچھ جو دعوے کی سی ڈالی ہے
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मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
میرے رشکِ قمر تو نے پہلی نظر جب نظر سے ملائی مزا آ گیا
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जब भी आँखों में तिरे वस्ल का लम्हा चमका
Amjad Islam Amjad द्वारा
جب بھی آنکھوں میں ترے وصل کا لمحہ چمکا
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आज मल्बूस में है कैसी थकन की ख़ुशबू
परवीन शाकिर द्वारा
آج ملبوس میں ہے کیسی تھکن کی خوشبو
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जी ही जी में वो जल रही होगी
जौन एलिया द्वारा
جی ہی جی میں وہ جل رہی ہوگی
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पीते ही सुर्ख़ आँखें हैं मस्त शराब की
قمر جلالوی द्वारा
پیتے ہی سرخ آنکھیں ہیں مست شراب کی
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शहर से यार सवार हुआ जो सवाद में ख़ूब ग़ुबार है आज
मीर तक़ी मीर द्वारा
شہر سے یار سوار ہوا جو سواد میں خوب غبار ہے آج
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नाज़-ए-चमन वही है बुलबुल से गो ख़िज़ां है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ناز چمن وہی ہے بلبل سے گو خزاں ہے
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यह चश्म आईना-दार-ए-रू थी किसू की
मीर तक़ी मीर द्वारा
یہ چشم آئینہ دار رو تھی کسو کی
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हर जज़्र-ओ-मद से दस्त-ओ-बग़ल उठते हैं ख़रोश
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہر جزر و مد سے دست و بغل اٹھتے ہیں خروش
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ख़ूब है शौक़ का यह पहलू भी
जौन एलिया द्वारा
خوب ہے شوق کا یہ پہلو بھی
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बदन में आग है चेहरा गुलाब जैसा है
अहमद फ़राज़ द्वारा
بدن میں آگ ہے چہرہ گلاب جیسا ہے
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जो देखो मिरे शेर-ए-तर की तरफ़
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو دیکھو مرے شعر تر کی طرف
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तलवार ग़र्क़-ए-ख़ूँ है आँखें गुलाबियाँ हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
تلوار غرق خوں ہے آنکھیں گلابیاں ہیں
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मर मर गए नज़र कर उस के बरहना तन में
मीर तक़ी मीर द्वारा
مر مر گئے نظر کر اس کے برہنہ تن میں
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