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आँख उठी मोहब्बत ने अंगड़ाई ली
آنکھ اٹھی محبت نے انگڑائی لی
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काश उठें हम भी गुनाहगारों के बीच
کاش اٹھیں ہم بھی گنہ گاروں کے بیچ
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यूँ सजा चाँद कि छलका तेरे अंदाज़ का रंग
یوں سجا چاند کہ جھلکا ترے انداز کا رنگ
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जो मिटा है तेरे जमाल पर वो हर एक ग़म से गुज़र गया
جو مٹا ہے تیرے جمال پر وہ ہر ایک غم سے گزر گیا
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है किस क़दर हलाक-ए-फ़रेब-ए-वफ़ा-ए-गुल
ہے کس قدر ہلاک فریب وفائے گل
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