ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
इबादत
सभी
16
अशआर
0
ग़ज़ल
16
ग़ज़ल
16
0
मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
0
हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
0
न देर में न हरम में जबीं झुकी होगी
نہ دیر میں نہ حرم میں جبیں جھکی ہوگی
0
हरम है क्या चीज़ देर क्या है किसी पे मेरी नज़र नहीं है
حرم ہے کیا چیز دیر کیا ہے کسی پہ میری نظر نہیں ہے
0
यह तमन्ना है कि इस तरह मुसलमान होता
یہ تمنا ہے کہ اس طرح مسلماں ہوتا
सभी देखें
कवियों की सूची
कवियों
और जानें