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सभी 74अशआर 0ग़ज़ल 74
ग़ज़ल74
चश्म-ए-मैगूं ज़रा इधर कर दे
چشم میگوں ذرا ادھر کر دے
कितनी सरकश भी हो सरफिरी यह हवा रखना रोशन दिया
کتنی سرکش بھی ہو سرپھری یہ ہوا رکھنا روشن دیا
मेरे संग मज़ार पर फ़रहाद
میرے سنگ مزار پر فرہاد
रही निगुफ़्ता मेरे दिल में दास्तान मेरी
رہی نگفتہ مرے دل میں داستاں میری
आगे जमाल-ए-यार के माज़ूर हो गया
آگے جمال یار کے معذور ہو گیا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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