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मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही
فیض احمد فیض द्वारा
نہیں نگاہ میں منزل تو جستجو ہی سہی
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चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
فیض احمد فیض द्वारा
چاند نکلے کسی جانب تری زیبائی کا
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शर्ह-ए-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई
فیض احمد فیض द्वारा
شرح بے دردئ حالات نہ ہونے پائی
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दिल में अब यूं तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
دل میں اب یوں ترے بھولے ہوئے غم آتے ہیں
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हसरत-ए-दीद में गुज़रां हैं ज़माने कब से
فیض احمد فیض द्वारा
حسرتِ دید میں گزراں ہیں زمانے کب سے
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आप की याद आती रही रात भर
فیض احمد فیض द्वारा
آپ کی یاد آتی رہی رات بھر
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न देर में न हरम में जबीं झुकी होगी
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
نہ دیر میں نہ حرم میں جبیں جھکی ہوگی
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हुस्न मरहून जोश-ए-बादः-ए-नाज़
فیض احمد فیض द्वारा
حسن مرہون جوش بادۂ ناز
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किए आरज़ू से पैमां जो मा'ल तक न पहुंचे
فیض احمد فیض द्वारा
کیے آرزو سے پیماں جو مآل تک نہ پہنچے
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ऐ सनम देर न कर अंजुमन आरा हो जा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم دیر نہ کر انجمن آرا ہو جا
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है वजह कोई ख़ास मेरी आँख जो नम है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے وجہ کوئی خاص مری آنکھ جو نم ہے
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तुम आए हो न शब-ए-इंतज़ार गुज़री है
فیض احمد فیض द्वारा
تم آئے ہو نہ شب انتظار گزری ہے
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अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा
Amjad Islam Amjad द्वारा
اپنے گھر کی کھڑکی سے میں آسمان کو دیکھوں گا
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शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
فیض احمد فیض द्वारा
شفق کی راکھ میں جل بجھ گیا ستارۂ شام
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कुछ दिन से इंतज़ार-ए-सवाल-ए-दीगर में है
فیض احمد فیض द्वारा
کچھ دن سے انتظار سوال دگر میں ہے
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तुझे ढूँढती हैं नज़रें मुझे एक झलक दिखा जा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تجھے ڈھونڈھتی ہیں نظریں مجھے اک جھلک دکھا جا
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आज यूं मौज दर मौज ग़म थम गया
فیض احمد فیض द्वारा
آج یوں موج در موج غم تھم گیا
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इश्क़ में ज़िल्लत हुई ख़िफ़्फ़त हुई तोहमत हुई
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں ذلت ہوئی خفت ہوئی تہمت ہوئی
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अंधेरे लाख छा जाएँ उजाला कम नहीं होता
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اندھیرے لاکھ چھا جائیں اجالا کم نہیں ہوتا
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