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हस्ती अपनी हबाब की सी है
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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उम्र भर हम रहे शराबी से
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
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अश्क आँखों में कब नहीं आता
اشک آنکھوں میں کب نہیں آتا
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हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
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