ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
इश्क़
सभी
228
अशआर
0
ग़ज़ल
228
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
हस्ती अपनी हबाब की सी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
0
मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
0
उम्र भर हम रहे शराबी से
मीर तक़ी मीर द्वारा
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
0
अश्क आँखों में कब नहीं आता
मीर तक़ी मीर द्वारा
اشک آنکھوں میں کب نہیں آتا
0
हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
0
नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही
فیض احمد فیض द्वारा
نہیں نگاہ میں منزل تو جستجو ہی سہی
0
था मुस्तआर हुस्न से उस के जो नूर था
मीर तक़ी मीर द्वारा
تھا مستعار حسن سے اس کے جو نور تھا
0
चोरी में दिल की वो हुनर कर गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
چوری میں دل کی وہ ہنر کر گیا
0
शर्ह-ए-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई
فیض احمد فیض द्वारा
شرح بے دردئ حالات نہ ہونے پائی
0
राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
راہ دور عشق میں روتا ہے کیا
0
न देर में न हरम में जबीं झुकी होगी
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
نہ دیر میں نہ حرم میں جبیں جھکی ہوگی
0
जब तक मरे होंटों पे तेरा नाम रहेगा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جب تک مرے ہونٹوں پہ ترا نام رہے گا
0
देख तो दिल के जां से उठता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
0
ऐ सनम देर न कर अंजुमन आरा हो जा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم دیر نہ کر انجمن آرا ہو جا
0
ढूंढा न पाईए जो इस वक़्त में सो ज़र है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ڈھونڈا نہ پائیے جو اس وقت میں سو زر ہے
0
यह तमन्ना है कि इस तरह मुसलमान होता
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
یہ تمنا ہے کہ اس طرح مسلماں ہوتا
0
हैरान है जबीं आज किधर सज्दा रवां है
فیض احمد فیض द्वारा
حیراں ہے جبیں آج کدھر سجدہ روا ہے
0
कुछ मुहतसिबों की ख़लवत में कुछ वाइज़ के घर जाती है
فیض احمد فیض द्वारा
کچھ محتسبوں کی خلوت میں کچھ واعظ کے گھر جاتی ہے
0
है वजह कोई ख़ास मेरी आँख जो नम है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے وجہ کوئی خاص مری آنکھ جو نم ہے
0
आँख उठी मोहब्बत ने अंगड़ाई ली
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھ اٹھی محبت نے انگڑائی لی
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें