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चमन में गुल ने जो कल दावा-ए-जमाल किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
چمن میں گل نے جو کل دعوی جمال کیا
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फिर लौटा है ख़ुर्शीद-ए-जहाँ-ताब सफ़र से
فیض احمد فیض द्वारा
پھر لوٹا ہے خورشید جہاں تاب سفر سے
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इश्क़ में ने ख़ौफ़-ओ-ख़तर चाहिए
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں نے خوف و خطر چاہیے
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वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
فیض احمد فیض द्वारा
وہ بتوں نے ڈالے ہیں وسوسے کہ دلوں سے خوف خدا گیا
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गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
فیض احمد فیض द्वारा
گلوں میں رنگ بھرے باد نوبہار چلے
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معاف کر مری مستی خدائے عز و جل
अहमद फ़राज़ द्वारा
معاف کر مری مستی خدائے عز و جل
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रह-ए-ख़िज़ां में तलाश-ए-बहार करते रहे
فیض احمد فیض द्वारा
رہ خزاں میں تلاش بہار کرتے رہے
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