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हाल यह है कि ख़्वाहिश-ए-पुरसिश-ए-हाल भी नहीं
حال یہ ہے کہ خواہش پرسش حال بھی نہیں
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निकल के हल्क़ा-ए-शाम-ओ-सहर से जाएँ कहीं
نکل کے حلقۂ شام و سحر سے جائیں کہیں
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लाज़िम है अपने आप की इमदाद कुछ करूँ
لازم ہے اپنے آپ کی امداد کچھ کروں
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तुझ में पड़ा हुआ हूँ हरकत नहीं है मुझ में
تجھ میں پڑا ہوا ہوں حرکت نہیں ہے مجھ میں
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