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वहीं हैं दिल के क़राइन तमाम कहते हैं
وہیں ہیں دل کے قرائن تمام کہتے ہیں
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अपनी ही आवाज़ को बे शक कान में रखना
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
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ये शहर सहर ज़दा है सदा किसी की नहीं
یہ شہر سحر زدہ ہے صدا کسی کی نہیں
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अपनी ही आवाज़ को बे-शक़ कान में रखना
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
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क्या ऐसे कम-सुख़न से कोई गुफ़्तगू करे
کیا ایسے کم سخن سے کوئی گفتگو کرے
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