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ख़ामोशी

सभी 19अशआर 0ग़ज़ल 19
ग़ज़ल19
वहीं हैं दिल के क़राइन तमाम कहते हैं
وہیں ہیں دل کے قرائن تمام کہتے ہیں
अपनी ही आवाज़ को बे शक कान में रखना
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
ये शहर सहर ज़दा है सदा किसी की नहीं
یہ شہر سحر زدہ ہے صدا کسی کی نہیں
अपनी ही आवाज़ को बे-शक़ कान में रखना
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
क्या ऐसे कम-सुख़न से कोई गुफ़्तगू करे
کیا ایسے کم سخن سے کوئی گفتگو کرے
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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