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वहीं हैं दिल के क़राइन तमाम कहते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
وہیں ہیں دل کے قرائن تمام کہتے ہیں
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अपनी ही आवाज़ को बे शक कान में रखना
अहमद फ़राज़ द्वारा
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
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ये शहर सहर ज़दा है सदा किसी की नहीं
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ شہر سحر زدہ ہے صدا کسی کی نہیں
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अपनी ही आवाज़ को बे-शक़ कान में रखना
अहमद फ़राज़ द्वारा
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
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क्या ऐसे कम-सुख़न से कोई गुफ़्तगू करे
अहमद फ़राज़ द्वारा
کیا ایسے کم سخن سے کوئی گفتگو کرے
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काबे में जाँ-ब-लब थे हम दूरी-ए-बुताँ से
मीर तक़ी मीर द्वारा
کعبے میں جاں بہ لب تھے ہم دوریٔ بتاں سے
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अगर छोटा भी इस से आइना-ख़ाना तो क्या होगा
قمر جلالوی द्वारा
اگر چھوٹا بھی اس سے آئنہ خانہ تو کیا ہوگا
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क्या कहें अपनी उस की शब की बात
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیں اپنی اس کی شب کی بات
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सामने उस के कभी उस की सताइश नहीं की
अहमद फ़राज़ द्वारा
سامنے اس کے کبھی اس کی ستائش نہیں کی
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हो का आलम है यहाँ नाला-गरों के होते
जौन एलिया द्वारा
ہو کا عالم ہے یہاں نالہ گروں کے ہوتے
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रिदा-ए-ज़ख़्म हर गुल-पैरहन पहने हुए है
अहमद फ़राज़ द्वारा
ردائے زخم ہر گل پیرہن پہنے ہوئے ہے
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आज लब-ए-गौहर-फ़िशाँ आप ने वा नहीं किया
जौन एलिया द्वारा
آج لب گہر فشاں آپ نے وا نہیں کیا
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था कोई या नहीं था जो कुछ था
अहमद फ़राज़ द्वारा
تھا کوئی یا نہیں تھا جو کچھ تھا
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जो क़ुर्बतों के नशे थे वो अब उतरने लगे
अहमद फ़राज़ द्वारा
جو قربتوں کے نشے تھے وہ اب اترنے لگے
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खेल उस ने दिखा के जादू के
Amjad Islam Amjad द्वारा
کھیل اس نے دکھا کے جادو کے
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यादों का हिसाब रख रहा हूँ
जौन एलिया द्वारा
یادوں کا حساب رکھ رہا ہوں
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शाम थी और बर्ग-ओ-गुल शल थे मगर सबा भी थी
जौन एलिया द्वारा
شام تھی اور برگ و گل شل تھے مگر صبا بھی تھی
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मेरा ख़ामोश रह कर भी उन्हें सब कुछ सुना देना
قمر جلالوی द्वारा
مرا خاموش رہ کر بھی انہیں سب کچھ سنا دینا
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चल निकलती हैं ग़म-ए-यार से बातें क्या क्या
अहमद फ़राज़ द्वारा
چل نکلتی ہیں غم یار سے باتیں کیا کیا
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