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हस्ती अपनी हबाब की सी है
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
سنا ہے لوگ اسے آنکھ بھر کے دیکھتے ہیں
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किए आरज़ू से पैमां जो मा'ल तक न पहुंचे
کیے آرزو سے پیماں جو مآل تک نہ پہنچے
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अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा
اپنے گھر کی کھڑکی سے میں آسمان کو دیکھوں گا
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बंद था दरवाज़ा भी और घर में भी तन्हा था मैं
بند تھا دروازہ بھی اور گھر میں بھی تنہا تھا میں
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