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हस्ती अपनी हबाब की सी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
سنا ہے لوگ اسے آنکھ بھر کے دیکھتے ہیں
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किए आरज़ू से पैमां जो मा'ल तक न पहुंचे
فیض احمد فیض द्वारा
کیے آرزو سے پیماں جو مآل تک نہ پہنچے
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अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा
Amjad Islam Amjad द्वारा
اپنے گھر کی کھڑکی سے میں آسمان کو دیکھوں گا
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बंद था दरवाज़ा भी और घर में भी तन्हा था मैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
بند تھا دروازہ بھی اور گھر میں بھی تنہا تھا میں
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सदियाँ जिन में ज़िंदा हूँ वो सच भी मरने लगते हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
صدیاں جن میں زندہ ہوں وہ سچ بھی مرنے لگتے ہیں
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अगरचे कोई भी अंधा नहीं था
Amjad Islam Amjad द्वारा
اگرچہ کوئی بھی اندھا نہیں تھا
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सोच के गुंबद में उभरी टूटती यादों की गूँज
Amjad Islam Amjad द्वारा
سوچ کے گنبد میں ابھری ٹوٹتی یادوں کی گونج
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आशिक़ी में मीर जैसे ख़्वाब मत देखा करो
अहमद फ़राज़ द्वारा
عاشقی میں میرؔ جیسے خواب مت دیکھا کرو
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आँखों से इक ख़्वाब गुज़रने वाला है
Amjad Islam Amjad द्वारा
آنکھوں سے اک خواب گزرنے والا ہے
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हवा-ए-ताज़ा में फिर जिस्म-ओ-जाँ बसाने का
परवीन शाकिर द्वारा
ہوائے تازہ میں پھر جسم و جاں بسانے کا
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रंग ख़ुशबू में अगर हल हो जाए
परवीन शाकिर द्वारा
رنگ خوش بو میں اگر حل ہو جائے
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आँखों से मेरी कौन मिरे ख़्वाब ले गया
परवीन शाकिर द्वारा
آنکھوں سے میری کون مرے خواب لے گیا
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ऐ तू कि रोज़ ओ शब को मह ओ आफ़ताब दे
अहमद फ़राज़ द्वारा
اے تو کہ روز و شب کو مہ و آفتاب دے
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रमक़ एक जान वबाल है कोई दम जो है तो अज़ाब है
मीर तक़ी मीर द्वारा
رمق ایک جان وبال ہے کوئی دم جو ہے تو عذاب ہے
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गए मौसम में जो खिलते थे गुलाबों की तरह
परवीन शाकिर द्वारा
گئے موسم میں جو کھلتے تھے گلابوں کی طرح
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दश्त बे-आब की तरह गुज़री
Amjad Islam Amjad द्वारा
دشت بے آب کی طرح گزری
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थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी
Amjad Islam Amjad द्वारा
تھے خواب ایک ہمارے بھی اور تمہارے بھی
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डसने लगे हैं ख़्वाब मगर किस से बोलिए
परवीन शाकिर द्वारा
ڈسنے لگے ہیں خواب مگر کس سے بولئے
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सुंदर कोमल सपनों की बारात गुज़र गई जानाँ
परवीन शाकिर द्वारा
سندر کومل سپنوں کی بارات گزر گئی جاناں
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