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न हम रहे न वो ख़्वाबों की ज़िंदगी ही रही
نہ ہم رہے نہ وہ خوابوں کی زندگی ہی رہی
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ख़्वाब के रंग दिल-ओ-जाँ में सजाए भी गए
خواب کے رنگ دل و جاں میں سجائے بھی گئے
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ख़्वाब की हालतों के साथ तेरी हिकायतों में हैं
خواب کی حالتوں کے ساتھ تیری حکایتوں میں ہیں
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हम भी शायर थे कभी जान-ए-सुख़न याद नहीं
ہم بھی شاعر تھے کبھی جان سخن یاد نہیں
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ख़ूब थे वे दिन कि हम तेरे गिरफ़्तारों में थे
خوب تھے وے دن کہ ہم تیرے گرفتاروں میں تھے
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