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न जाओ घर अभी तो रात है बादल भी काले हैं
نہ جاؤ گھر ابھی تو رات ہے بادل بھی کالے ہیں
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हवा शब को अबस मय के लिए जाना तो क्या होगा
ہوا شب کو عبث مے کے لئے جانا تو کیا ہوگا
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ताक़त नहीं है जी में ने अब जिगर रहा है
طاقت نہیں ہے جی میں نے اب جگر رہا ہے
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करेंगे शिक्व-ए-जौर-ओ-जफ़ा दिल खोल कर अपना
کریں گے شکوۂ جور و جفا دل کھول کر اپنا
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बंद क़बा को ख़ूबाँ जिस वक़्त वा करेंगे
بند قبا کو خوباں جس وقت وا کریں گے
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