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मलाल

सभी 22अशआर 0ग़ज़ल 22
ग़ज़ल22
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
کہاں آ کے رکنے تھے راستے کہاں موڑ تھا اسے بھول جا
अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएं हम
اب اور کیا کسی سے مراسم بڑھائیں ہم
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
کچھ تو ہوا بھی سرد تھی کچھ تھا ترا خیال بھی
शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें
شرمندگی ہے ہم کو بہت ہم ملے تمہیں
आँखों में नमी आई चेहरे पे मलाल आया
آنکھوں میں نمی آئی چہرے پہ ملال آیا
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