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कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
Amjad Islam Amjad द्वारा
کہاں آ کے رکنے تھے راستے کہاں موڑ تھا اسے بھول جا
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अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएं हम
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب اور کیا کسی سے مراسم بڑھائیں ہم
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कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
परवीन शाकिर द्वारा
کچھ تو ہوا بھی سرد تھی کچھ تھا ترا خیال بھی
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शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें
जौन एलिया द्वारा
شرمندگی ہے ہم کو بہت ہم ملے تمہیں
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आँखों में नमी आई चेहरे पे मलाल आया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھوں میں نمی آئی چہرے پہ ملال آیا
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हुज़ूर-ए-यार में हर्फ़-ए-इल्तिजा के रक्खे थे
Amjad Islam Amjad द्वारा
حضور یار میں حرف التجا کے رکھے تھے
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अगरचे कोई भी अंधा नहीं था
Amjad Islam Amjad द्वारा
اگرچہ کوئی بھی اندھا نہیں تھا
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जानां दिल का शहर नगर अफ़सोस का है
अहमद फ़राज़ द्वारा
جاناں دل کا شہر نگر افسوس کا ہے
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लहू में तैरते फिरते मलाल से कुछ हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
لہو میں تیرتے پھرتے ملال سے کچھ ہیں
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जब हम कलाम हम से होता है पान खा कर
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب ہم کلام ہم سے ہوتا ہے پان کھا کر
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ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें
अहमद फ़राज़ द्वारा
لے اڑا پھر کوئی خیال ہمیں
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इक हुनर था कमाल था क्या था
परवीन शाकिर द्वारा
اک ہنر تھا کمال تھا کیا تھا
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न फिर रखेंगे तेरी रह में पा हम
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہ پھر رکھیں گے تیری رہ میں پا ہم
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कब उसका विसाल चाहिए था
जौन एलिया द्वारा
کب اس کا وصال چاہیے تھا
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न हम रहे न वो ख़्वाबों की ज़िंदगी ही रही
जौन एलिया द्वारा
نہ ہم رہے نہ وہ خوابوں کی زندگی ہی رہی
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ख़ुश न आई तुम्हारी चाल हमें
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوش نہ آئی تمہاری چال ہمیں
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वो क्या कुछ न करने वाले थे
जौन एलिया द्वारा
وہ کیا کچھ نہ کرنے والے تھے
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शाम थी और बर्ग-ओ-गुल शल थे मगर सबा भी थी
जौन एलिया द्वारा
شام تھی اور برگ و گل شل تھے مگر صبا بھی تھی
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मुंद गईं खोलते ही खोलते आँखें 'ग़ालिब'
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
مند گئیں کھولتے ہی کھولتے آنکھیں غالبؔ
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न कोई हिज्र न कोई विसाल है शायद
जौन एलिया द्वारा
نہ کوئی ہجر نہ کوئی وصال ہے شاید
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