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सभी 103अशआर 0ग़ज़ल 103
ग़ज़ल103
कभी जब मुद्दतों के बाद उस का सामना होगा
کبھی جب مدتوں کے بعد اس کا سامنا ہوگا
दश्त-ए-दिल में सराब ताज़ा हैं
دشت دل میں سراب تازہ ہیں
बग़ैर दिल के यह क़ीमत है सारे आलम की
بغیر دل کہ یہ قیمت ہے سارے عالم کی
सैर के क़ाबिल है दिल सद-पारा उस नख़चीर का
سیر کے قابل ہے دل صد پارہ اس نخچیر کا
हाल यह है कि ख़्वाहिश-ए-पुरसिश-ए-हाल भी नहीं
حال یہ ہے کہ خواہش پرسش حال بھی نہیں
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