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मायूसी

सभी 103अशआर 0ग़ज़ल 103
ग़ज़ल103
वह मजबूरी नहीं थी यह अदाकारी नहीं है
وہ مجبوری نہیں تھی یہ اداکاری نہیں ہے
कब तलक जी रुके ख़फ़ा होवे
کب تلک جی رکے خفا ہووے
क़ाबू ख़िज़ाँ से ज़ो'फ़ का गुलशन में बन गया
قابو خزاں سے ضعف کا گلشن میں بن گیا
दिल पहुँचा हलाकी को निपट खेंच कसाला
دل پہنچا ہلاکی کو نپٹ کھینچ کسالا
तंग आए हैं दिल इस जी से उठा बैठें गे
تنگ آئے ہیں دل اس جی سے اٹھا بیٹھیں گے
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