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आँख उठी मोहब्बत ने अंगड़ाई ली
آنکھ اٹھی محبت نے انگڑائی لی
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मूसै समझे थे अरमाँ निकल जाएगा
موسیٰ سمجھے تھے ارماں نکل جائے گا
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कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो
کٹھن ہے راہ گزر تھوڑی دور ساتھ چلو
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मुस्तक़िल महरूमियों पर भी तो दिल माना नहीं
مستقل محرومیوں پر بھی تو دل مانا نہیں
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ख़त्म-ए-शब क़िस्सा-ए-मुख़्तसर न हुई
ختم شب قصۂ مختصر نہ ہوئی
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