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आँख उठी मोहब्बत ने अंगड़ाई ली
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھ اٹھی محبت نے انگڑائی لی
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मूसै समझे थे अरमाँ निकल जाएगा
قمر جلالوی द्वारा
موسیٰ سمجھے تھے ارماں نکل جائے گا
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कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो
अहमद फ़राज़ द्वारा
کٹھن ہے راہ گزر تھوڑی دور ساتھ چلو
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मुस्तक़िल महरूमियों पर भी तो दिल माना नहीं
अहमद फ़राज़ द्वारा
مستقل محرومیوں پر بھی تو دل مانا نہیں
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ख़त्म-ए-शब क़िस्सा-ए-मुख़्तसर न हुई
قمر جلالوی द्वारा
ختم شب قصۂ مختصر نہ ہوئی
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गाहे गाहे बस अब यही हो क्या
जौन एलिया द्वारा
گاہے گاہے بس اب یہی ہو کیا
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सभी कहें मरे ग़म-ख़्वार के अलावा भी
अहमद फ़राज़ द्वारा
سبھی کہیں مرے غم خوار کے علاوہ بھی
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कल बारे हम से उस से मुलाक़ात हो गई
मीर तक़ी मीर द्वारा
کل بارے ہم سے اس سے ملاقات ہو گئی
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ये रस्ते में किस से मुलाक़ात कर ली
قمر جلالوی द्वारा
یہ رستے میں کس سے ملاقات کر لی
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न मंज़िलों को न हम रह-गुज़र को देखते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ منزلوں کو نہ ہم رہ گزر کو دیکھتے ہیں
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भीड़ में इक अजनबी का सामना अच्छा लगा
Amjad Islam Amjad द्वारा
بھیڑ میں اک اجنبی کا سامنا اچھا لگا
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हवा महक उठी रंग-ए-चमन बदलने लगा
परवीन शाकिर द्वारा
ہوا مہک اٹھی رنگ چمن بدلنے لگا
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