Haal Dil Mir Ka Ro Ro Ke Sab Ae Maah Suna
حال دل میرؔ کا رو رو کے سب اے ماہ سنا
हाल दिल 'मीर' का रो रो के सब ऐ माह सुना
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंحال دل میرؔ کا رو رو کے سب اے ماہ سنا
شب کو القصہ عجب قصۂ جانکاہ سنا
Haal dil Mir ka ro ro ke sab ae maah suna
Shab ko al-qissa ajab qissa-e-jankaah suna
हाल दिल 'मीर' का रो रो के सब ऐ माह सुना
शब को अल-क़िस्सा अजब क़िस्सा-ए-जाँकाह सुना
نابلد ہو کے رہ عشق میں پہنچوں تو کہیں
ہمرا خضر کو یاں کہتے ہیں گمراہ سنا
Na-balad ho ke reh-e-ishq mein pahunchun to kahin
Humra Khizr ko yaan kehte hain gumraah suna
ना-बलद हो के रह-ए-इश्क़ में पहुँचूँ तो कहीं
हमरा ख़िज़्र को याँ कहते हैं गुमराह सुना

मीर तक़ी मीर1723–1810
शास्त्रीय
मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।
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