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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
अहमद फ़राज़ द्वारा
رنجش ہی سہی دل ہی دکھانے کے لیے آ
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इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس قدر مسلسل تھیں شدتیں جدائی کی
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बारिश में अहद तोड़ के गर मय-कशी हुई
قمر جلالوی द्वारा
بارش میں عہد توڑ کے گر مے کشی ہوئی
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वहशत थी हमें भी वही घर बार से अब तक
मीर तक़ी मीर द्वारा
وحشت تھی ہمیں بھی وہی گھر بار سے اب تک
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क्यों न हम अहद-ए-रफ़ाक़त को भुलाने लग जाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
کیوں نہ ہم عہد رفاقت کو بھلانے لگ جائیں
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बे-नियाज़-ए-ग़म-ए-पैमान-ए-वफ़ा हो जाना
अहमद फ़राज़ द्वारा
بے نیاز غم پیمان وفا ہو جانا
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ख़ुश न आई तुम्हारी चाल हमें
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوش نہ آئی تمہاری چال ہمیں
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दामन वसीअ था तो काहे को चश्म तरसा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دامن وسیع تھا تو کاہے کو چشم ترسا
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ये अक्सर तल्ख़-कामी सी रही क्या
जौन एलिया द्वारा
یہ اکثر تلخ کامی سی رہی کیا
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पेच रखते हो बहुत साहिबो दस्तार के बीच
अहमद फ़राज़ द्वारा
پیچ رکھتے ہو بہت صاحبو دستار کے بیچ
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न तेरा क़ुर्ब न बादा है क्या क्या जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ تیرا قرب نہ بادہ ہے کیا کیا جائے
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