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दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
دل جو زیر غبار اکثر تھا
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हैरान है जबीं आज किधर सज्दा रवां है
حیراں ہے جبیں آج کدھر سجدہ روا ہے
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वो आग़ाज़-ए-मोहब्बत का ज़माना
وہ آغاز محبت کا زمانہ
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दोनों हैं उन के हिज्र का हासिल लिये हुए
دونوں ہیں ان کے ہجر کا حاصل لئے ہوئے
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दूरियाँ सिमटने में देर कुछ तो लगती है
دوریاں سمٹنے میں دیر کچھ تو لگتی ہے
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