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देख तो दिल के जाँ से उठता है
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
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अजब जुनूं-ए-मुसाफ़त में घर से निकला था
عجب جنون مسافت میں گھر سے نکلا تھا
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याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र
یاد کے صحرا میں کچھ تو زندگی آئے نظر
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हम मुसाफ़िर यूँ ही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगे
ہم مسافر یوں ہی مصروف سفر جائیں گے
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कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो
کٹھن ہے راہ گزر تھوڑی دور ساتھ چلو
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