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सफ़र

सभी 22अशआर 0ग़ज़ल 22
ग़ज़ल22
देख तो दिल के जाँ से उठता है
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
अजब जुनूं-ए-मुसाफ़त में घर से निकला था
عجب جنون مسافت میں گھر سے نکلا تھا
याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र
یاد کے صحرا میں کچھ تو زندگی آئے نظر
हम मुसाफ़िर यूँ ही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगे
ہم مسافر یوں ہی مصروف سفر جائیں گے
कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो
کٹھن ہے راہ گزر تھوڑی دور ساتھ چلو
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