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देख तो दिल के जाँ से उठता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
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अजब जुनूं-ए-मुसाफ़त में घर से निकला था
अहमद फ़राज़ द्वारा
عجب جنون مسافت میں گھر سے نکلا تھا
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याद के सहरा में कुछ तो ज़िंदगी आए नज़र
Amjad Islam Amjad द्वारा
یاد کے صحرا میں کچھ تو زندگی آئے نظر
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हम मुसाफ़िर यूँ ही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगे
فیض احمد فیض द्वारा
ہم مسافر یوں ہی مصروف سفر جائیں گے
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कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो
अहमद फ़राज़ द्वारा
کٹھن ہے راہ گزر تھوڑی دور ساتھ چلو
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मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से
परवीन शाकिर द्वारा
مشکل ہے کہ اب شہر میں نکلے کوئی گھر سے
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साये ढलने चराग़ जलने लगे
Amjad Islam Amjad द्वारा
سائے ڈھلنے چراغ جلنے لگے
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न आसमाँ से न दुश्मन के ज़ोर-ओ-ज़र से हुआ
Amjad Islam Amjad द्वारा
نہ آسماں سے نہ دشمن کے زور و زر سے ہوا
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निकल के हल्क़ा-ए-शाम-ओ-सहर से जाएँ कहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
نکل کے حلقۂ شام و سحر سے جائیں کہیں
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समुंदरों के उधर से कोई सदा आई
परवीन शाकिर द्वारा
سمندروں کے ادھر سے کوئی صدا آئی
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फ़िक्र है माह के जो शहर बदर करने की
मीर तक़ी मीर द्वारा
فکر ہے ماہ کے جو شہر بدر کرنے کی
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मैं तो मक़्तल में भी क़िस्मत का सिकंदर निकला
अहमद फ़राज़ द्वारा
میں تو مقتل میں بھی قسمت کا سکندر نکلا
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दिल के दरिया को किसी रोज़ उतर जाना है
Amjad Islam Amjad द्वारा
دل کے دریا کو کسی روز اتر جانا ہے
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कब से हम लोग इस भँवर में हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
کب سے ہم لوگ اس بھنور میں ہیں
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खुलेगी इस नज़र पे चश्म-ए-तर आहिस्ता आहिस्ता
परवीन शाकिर द्वारा
کھلے گی اس نظر پہ چشم تر آہستہ آہستہ
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जुस्तजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे
परवीन शाकिर द्वारा
جستجو کھوئے ہوؤں کی عمر بھر کرتے رہے
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इश्क़ नशा है न जादू जो उतर भी जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
عشق نشہ ہے نہ جادو جو اتر بھی جائے
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क़दमों में भी तकान थी घर भी क़रीब था
परवीन शाकिर द्वारा
قدموں میں بھی تکان تھی گھر بھی قریب تھا
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तश्हीर अपने दर्द की हर सू कराइए
Amjad Islam Amjad द्वारा
تشہیر اپنے درد کی ہر سو کرائیے
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जब ब-तक़रीब-ए-सफ़र यार ने महमिल बाँधा
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جب بہ تقریب سفر یار نے محمل باندھا
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