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कल शब-ए-हिज्राँ थी लब पर नाला-ए-बीमाराना था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کل شب ہجراں تھی لب پر نالہ بیمارانہ تھا
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इस में कोई फ़रेब तो ऐ आसमाँ नहीं
قمر جلالوی द्वारा
اس میں کوئی فریب تو اے آسماں نہیں
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न किसी से पास मेरे यार का आना गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
نا کسی سے پاس میرے یار کا آنا گیا
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अब मुझे गुलशन से क्या जब ज़ेर-ए-दाम आ ही गया
قمر جلالوی द्वारा
اب مجھے گلشن سے کیا جب زیر دام آ ہی گیا
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