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गए जी से छोटे बुतों की जफ़ा से
گئے جی سے چھوٹے بتوں کی جفا سے
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बुरक़ा उठा था रुख़ से मिरे बद-गुमाँ का
برقع اٹھا تھا رخ سے مرے بد گمان کا
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बज़्म में जो तेरा ज़हूर नहीं
بزم میں جو ترا ظہور نہیں
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मेहर की तुझ से तवक़्क़ो थी सितम-गर निकला
مہر کی تجھ سے توقع تھی ستم گر نکلا
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मानिंद-ए-शम्अ-ए-मजलिस-ए-शब अश्कबार पाया
مانند شمع مجلس شب اشکبار پایا
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