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सभी 145अशआर 0ग़ज़ल 145
ग़ज़ल145
गुज़राँ हैं गुज़रते रहते हैं
گزراں ہیں گزرتے رہتے ہیں
उस ने हम को गुमान में रखा
اس نے ہم کو گمان میں رکھا
सजदे तेरे कहने से मैं कर लूँ भी तो क्या हो
سجدے ترے کہنے سے میں کر لوں بھی تو کیا ہو
कौन से थे वो तुम्हारे अहद जो टूटे न थे
کون سے تھے وہ تمہارے عہد جو ٹوٹے نہ تھے
इस में कोई फ़रेब तो ऐ आसमाँ नहीं
اس میں کوئی فریب تو اے آسماں نہیں
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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