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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
अहमद फ़राज़ द्वारा
رنجش ہی سہی دل ہی دکھانے کے لیے آ
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शर्ह-ए-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई
فیض احمد فیض द्वारा
شرح بے دردئ حالات نہ ہونے پائی
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हसरत-ए-दीद में गुज़रां हैं ज़माने कब से
فیض احمد فیض द्वारा
حسرتِ دید میں گزراں ہیں زمانے کب سے
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हैरान है जबीं आज किधर सज्दा रवां है
فیض احمد فیض द्वारा
حیراں ہے جبیں آج کدھر سجدہ روا ہے
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कुछ फ़ैसला तो हो कि किधर जाना चाहिए
परवीन शाकिर द्वारा
کچھ فیصلہ تو ہو کہ کدھر جانا چاہیے
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अब वही हर्फ़-ए-जुनूं सब की ज़बां ठहरी है
فیض احمد فیض द्वारा
اب وہی حرف جنوں سب کی زباں ٹھہری ہے
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ताना ज़न था हर कोई हम पर दिल-ए-नादाँ समेत
अहमद फ़राज़ द्वारा
طعنہ زن تھا ہر کوئی ہم پر دل ناداں سمیت
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कभी जब मुद्दतों के बाद उस का सामना होगा
जौन एलिया द्वारा
کبھی جب مدتوں کے بعد اس کا سامنا ہوگا
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پتا پتا بوٹا بوٹا حال ہمارا جانے ہے
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हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई
فیض احمد فیض द्वारा
ہم سادہ ہی ایسے تھے کی یوں ہی پذیرائی
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अब जो कोई पूछे भी तो इससे क्या शर्ह-ए-हालात करें
فیض احمد فیض द्वारा
اب جو کوئی پوچھے بھی تو اس سے کیا شرح حالات کریں
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वहीं हैं दिल के क़राइन तमाम कहते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
وہیں ہیں دل کے قرائن تمام کہتے ہیں
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शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें
जौन एलिया द्वारा
شرمندگی ہے ہم کو بہت ہم ملے تمہیں
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हमारे आगे तिरा जब कसू ने नाम लिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہمارے آگے ترا جب کسو نے نام لیا
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हमें से अपनी नवा हम-कलाम होती रही
فیض احمد فیض द्वारा
ہمیں سے اپنی نوا ہم کلام ہوتی رہی
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शर्ह-ए-फ़िराक़ मदह-ए-लब-ए-मुश्कबू करें
فیض احمد فیض द्वारा
شرح فراق مدح لب مشکبو کریں
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देखते हैं रक़्स में दिन रात पैमाने को हम
قمر جلالوی द्वारा
دیکھتے ہیں رقص میں دن رات پیمانے کو ہم
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काबे में जाँ-ब-लब थे हम दूरी-ए-बुताँ से
मीर तक़ी मीर द्वारा
کعبے میں جاں بہ لب تھے ہم دوریٔ بتاں سے
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फिर उस से तरह कुछ जो दावे की सी डाली है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پھر اس سے طرح کچھ جو دعوے کی سی ڈالی ہے
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गाहे गाहे बस अब यही हो क्या
जौन एलिया द्वारा
گاہے گاہے بس اب یہی ہو کیا
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