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अब तसव्वुर में हरम है न सनम ख़ाना है
اب تصور میں حرم ہے نہ صنم خانہ ہے
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दस्त-ओ-पा मारे वक़्त-ए-बिस्मिल तक
دست و پا مارے وقت بسمل تک
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अब हाल अपना उस के है दिल-ख़्वाह
اب حال اپنا اس کے ہے دل خواہ
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معاف کر مری مستی خدائے عز و جل
معاف کر مری مستی خدائے عز و جل
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बज़्म में जो तेरा ज़हूर नहीं
بزم میں جو ترا ظہور نہیں
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