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सुख़न

सभी 8अशआर 0ग़ज़ल 8
ग़ज़ल8
क्या कहें अपनी उस की शब की बात
کیا کہیں اپنی اس کی شب کی بات
हम ने जाना था सुख़न होंगे ज़बाँ पर कितने
ہم نے جانا تھا سخن ہوں گے زباں پر کتنے
नाज़-ए-चमन वही है बुलबुल से गो ख़िज़ां है
ناز چمن وہی ہے بلبل سے گو خزاں ہے
मर मर गए नज़र कर उस के बरहना तन में
مر مر گئے نظر کر اس کے برہنہ تن میں
आईनों में अक्स न हों तो हैरत रहती है
آئینوں میں عکس نہ ہوں تو حیرت رہتی ہے
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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