ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
सुख़न
सभी
8
अशआर
0
ग़ज़ल
8
ग़ज़ल
8
0
क्या कहें अपनी उस की शब की बात
کیا کہیں اپنی اس کی شب کی بات
0
हम ने जाना था सुख़न होंगे ज़बाँ पर कितने
ہم نے جانا تھا سخن ہوں گے زباں پر کتنے
0
नाज़-ए-चमन वही है बुलबुल से गो ख़िज़ां है
ناز چمن وہی ہے بلبل سے گو خزاں ہے
0
मर मर गए नज़र कर उस के बरहना तन में
مر مر گئے نظر کر اس کے برہنہ تن میں
0
आईनों में अक्स न हों तो हैरत रहती है
آئینوں میں عکس نہ ہوں تو حیرت رہتی ہے
सभी देखें
कवियों की सूची
कवियों
और जानें