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सभी 14अशआर 0ग़ज़ल 14
ग़ज़ल14
जीते जी कूचए-दिल-दार से जाया न गया
جیتے جی کوچۂ دل دار سے جایا نہ گیا
चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
چاند نکلے کسی جانب تری زیبائی کا
दिल बहम पहुँचा बदन में तब से सारा तन जला
دل بہم پہنچا بدن میں تب سے سارا تن جلا
दर-ए-कायनात जो वा करे उसी आगही की तलाश है
در کائنات جو وا کرے اسی آگہی کی تلاش ہے
ख़बर ही नहीं कैसे अंगड़ाई ले कर निगाहें उठाए कि साग़र उठाए
خبر ہی نہیں کیسے انگڑائی لے کر نگاہیں اٹھائے کہ ساغر اٹھائے
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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