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आँख उठी मोहब्बत ने अंगड़ाई ली
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھ اٹھی محبت نے انگڑائی لی
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मैं फ़क़त चलती रही मंज़िल को सर उस ने किया
परवीन शाकिर द्वारा
میں فقط چلتی رہی منزل کو سر اس نے کیا
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बे कसाना जी गिरफ़्तारी से शिवन में रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
بے کسانہ جی گرفتاری سے شیون میں رہا
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